00 राजस्थान के दंगल में दिखेगा अब संभावनाओं का खेल | Bazinga

कांग्रेस की हालत दिन -प्रतिदिन बद से बदतर होती जा रही है अभी कुछ दिन पहले मध्य प्रदेश में युवा नेता ज्यो्तिरादित्य सिंधिया कांग्रेस पार्टी को छोड़ बीजेपी में शामिल हो गए। इतने बड़े आघात से कांग्रेस पार्टी अभी सम्भली भी नहीं थी कि अब एक बार फिर से यही सब राजस्थान में भी घटित होने जा रहा है। ऐसा लग रहा है मानो तीन महीने पहले मध्य प्रदेश में हुए घटनाक्रम का रिपीट टैलिकास्ट अब राजस्थान में देखने को मिल रहा है। मध्य प्रदेश में कमलनाथ और ज्यो्तिरादित्य सिंधिया में कुसी की लड़ाई थी और यहां अशोक गहलोत और सचिन पायलट में है।

ज्यो्तिरादित्य सिंधिया और सचिन पायलट दोनों ही युवा नेताओं को यह लगता रहा कि सरकार उनके दम पर बनी है, लेकिन सेहरा किसी और के सिर बंधा है। इन दोनों को लगता है कि कांग्रेस इनकी अनदेखी कर रही है। इन दोनों के पिताओं में भी ढेरों समानताएं दिखती हैं। दोनों के ही पिता यानी राजेश पायलट और माधवराव सिंधिया, राहुल गांधी के पिता राजीव गांधी के बेहद करीबी थे। राजीव गांधी के करीबी होने के बावजूद दोनों को ही अपने प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने का मौका नहीं मिला और उन्हें कांग्रेस की अलग अलग सरकारें केंद्र में मंत्रिपद देकर ही संतुष्ट करती रहीं। इन्ही सब कारणों से ज्यो्तिरादित्य सिंधिया ने न केवल कांग्रेस से अपना रास्ता अलग किया बल्कि बीजेपी में ही शामिल हो गए ,जबकि पायलट अब तक चुप्पी साधे हैं।

उनके करीबी कहते है कि वह बीजेपी में नहीं जाएंगे, अगर जरूरत पर पड़ी तो अपनी स्वतंत्र पार्टी बनाएंगे। दोस्तों , सचिन पायलट के पिता राजेश पायलट गुर्जर समुदाय से आते हैं ,राजस्थान के कुछ जिलों में इस जाति का असर है और राजेश पायलट इसके नेता बने, अब सचिन भी इसी समुदाय के नेता हैं , इसके अलावा उनके संसदीय क्षेत्र अजमेर में अच्छी खासी संख्या मुस्लिम वोटरों की है जिनका साथ उन्हें हमेशा से मिलता रहा है। मजेदार बात यह है कि गुर्जर जाति हिंदू और मुसलमान दोनों धर्मों में बंटी हुई है, ऐसे में धर्म अलग होने के बावजूद गुर्जर के नाम पर पायलट को दोनों समुदाय के वोट हासिल होते हैं। ऐसे में अगर वे बीजेपी में जाते हैं तो उनका अपना मुस्लिम वोट बैंक छिन जाएगा , इसलिए वे बीजेपी में जाने से झिझक रहे हैं। यही कुछ खास बातें हैं जो पायलट और उनकी राजनीति को सिंधिया से अलग कर देती हैं , इसीलिए वे एक सी बिसात होने के बावजूद मोहरे अलग तरह से चल रहे हैं।

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