00 रियल से रील में आते मीडिया के चहिते विकास दुबे | Bazinga

जब से कानपुर के गैंगस्टर विकास दूबे का एनकाउंटर हुआ है , जहाँ देखो इस एनकाउंटर की ही बातें हो रही हैं। जिन्होंने कभी विकास दूबे का नाम भी नहीं सुना था वह भी इसके सभी कारनामे जान गए हैं। हर गली , नुक्कड़ से लेकर सोशल मीडिया के हर कोने में इस पर ही चर्चा हो रही है कि क्या ये एनकाउंटर पहले से तय था? क्या किसी सोची समझी साज़िश के तहत विकास दुबे को मध्यप्रदेश में पकड़ा और उत्तर प्रदेश में गोली मारी गयी? इस एनकाउंटर से किसे बचाया जा रहा है? लोगों की जिज्ञासा को देखते हुए चम्बल के बागी और नेशनल चैंपियन “पानसिंह तोमर” पर फिल्म बनाने वाले निर्देशक तिग्मांशु धूलिया ने तो अब विकास दूबे पर फिल्म बनाने की घोषणा कर दी है।


असली घटनाओं पर आधारित फिल्में, बायोपिक, सत्य घटनाओं से प्रभावित फिल्में, या फिल्मों में सत्य घटनाओं का फुटेज इस्तेमाल करना स्टोरी टेलिंग का एक बढ़िया तरीका है इसलिए बायोपिक और असली ज़िन्दगी की घटनाओं से प्रेरित कई फिल्में बनती रहती हैं। आजकल फिल्मों की कहानियां, निजी ज़िन्दगी के किस्सों से प्रभावित हो कर या ताज़ा तरीन घटनाओं पर बनायीं जाती है जिससे फिल्म के प्रमोशन में उसका इस्तेमाल किया जा सके। थोड़े ही दिन पहले गलवान में चीन की सेना के साथ हुई हिंसक झड़प में मारे गए 20 भारतीय सैनिकों पर अजय देवगन की कंपनी ने एक फिल्म बनाने की घोषणा की है। सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या के बाद भी कुछ फिल्म निर्माताओं ने उनकी ज़िन्दगी पर फिल्म बनाने की घोषणा की थी। अपराध, सिस्टम में जमा हुआ भ्रष्टाचार और पुलिस की कर्मठता और कार्य कुशलता फिल्मवालों का प्रिय विषय है।

अनुभव सिन्हा द्वारा निर्देशित फिल्म ‘आर्टिकल 15’ जो कि संविधान के आर्टिकल 15 पर आधारित है जो कि धर्म, जाति, समाज, लिंग, जन्मस्थान इत्यादि के आधार पर किसी भी तरह के भेदभाव को रोकता है। बिहार की पुलिस के फ़्रस्ट्रेशन पर बनी गंगाजल, हाजी मस्तान और दाऊद इब्राहिम पर बनी वन्स अपॉन अ टाइम इन मुंबई, बिहार पुलिस की लाचारी पर बनी शूल या फिर मुंबई पुलिस के पहले एनकाउंटर की कहानी – शूट आउट एट वडाला! पुलिस एनकाउंटर पर बनी अब तक की सर्वश्रेष्ठ फिल्म है। नाना पाटेकर की फिल्म अब तक छप्पन जिसमें उनका किरदार मुंबई के एनकाउंटर कॉप दया नायक की ज़िन्दगी पर आधारित है। वैसे तो भगत सिंह, महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और अन्य महत्वपूर्ण व्यक्तियों पर फिल्में बनती रहती हैं। नरेंद्र मोदी, एक एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर, गांधी माय फादर, शहीद उधम सिंह, परमाणु, बाजीराव मस्तानी, उरी दा सर्जिकल स्ट्राइक जैसी कई फिल्मों ने बायोपिक, सत्य घटनाओं से प्रेरणा लेकर लोगों को एंटरटेन किया है। अब विकास दूबे के एनकाउंटर ने फिल्म वालों को कुछ और फिल्में बनाने का मौका दिया है।

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