00 आखिर क्यों नहीं निभा पाए चौधरी देवीलाल अपना धर्म ? | Bazinga

राजनीतिक पार्टियां हमेशा से ही सरकार बनाने के लिए कई तरह के जोड़ -तोड़ करती हैं फिर चाहे वो धन शक्ति के उपयोग से हो या जन शक्ति के उपयोग से हो। देश के लोकतांत्रिक इतिहास में कई ऐसे राज्यपाल हुए, जिनके पक्षपात की कहानियां अब भी आम है। एक ऐसा किस्सा हरियाणा में 1982 विधान सभा चुनाव में हुआ था जिसे आज मै आप से शेयर कर रहा हूं।

वर्ष 1982 के हरियाणा विधानसभा चुनाव में लोकदल और बीजेपी दोनों संयुक्त रूप से चुनाव मैदान में थे। चुनाव में लोकदल की 31 सीटें , 6 सीटें भाजपा, 1 सीट जनता पार्टी, 36 सीटें कांग्रेस और 16 सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीतीं। किसी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। उस वक्त चौधरी देवीलाल अपने बड़े बेटे ओमप्रकाश से इस कदर नाराज हो गए थे कि पार्टी कार्यालय तक में उन्हें घुसने के लिए मना कर दिया था। अब ये राज्यपाल पर था कि वो किस गठबंधन को सरकार बनाने के लिए बुलाते हैं।

22 मई 1982 को चौधरी देवीलाल, डॉ. मंगल सेन, प्रकाश सिंह बादल, रवि राय सरीखे नेता हरियाणा के राज्यपाल जीडी तपासे से मिले और उन्हें 48 विधायकों की सूची सौंपकर देवीलाल की अगुआई में सरकार बनाने का प्रस्ताव पेश कर दिया। राज्यपाल तपासे ने सहमति जताते हुए 24 मई की सुबह तक विधायकों की पहचान के लिए उन्हें राजभवन में आमंत्रित किया। विधिवत तौर पर देवीलाल ही मुख्यमंत्री होंगे, ऐसा समाचार पूरे देश में प्रचारित-प्रसारित हो गया। इसी बीच एक आश्चर्यजनक घटना हुई 23 मई को आनन-फानन में कांग्रेस ने जोड़तोड़ कर रविवार को सरकार बना ली और कांग्रेस नेता भजन लाल को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिला दी गई। उस समय श्रीमती इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री और राजीव गांधी कांग्रेस के महामंत्री थे। लोकदल-बीजेपी गठबंधन को 48 विधायकों का समर्थन होने के बावजूद राज्यपाल ने दिल्ली के इशारे पर यह असंवैधानिक कदम उठाया। राज्यपाल के इस पक्षपात से पूरा देश हतप्रभ रह गया था।

ससे नाराज हो कर देवीलाल ने न्याय युद्ध चलाया। देवीलाल संयुक्त पंजाब और बाद में हरियाणा के सबसे लोकप्रिय जननेताओं में रहे हैं। उस संघर्ष व तकरार वाले तेवर के देवीलाल को राज्यपाल का यह फैसला नागवार गुजरा। उन्होंने कानूनी लड़ाई के बजाय जन अदालत में इस बात को उठाया और चंडीगढ़ में विशाल विरोध रैली आयोजित की जिसमें प्रत्येक जिले में बनीं संघर्ष समितियां भीड़ के साथ चंडीगढ़ पहुंचीं।

देवीलाल , लोकदल, बीजेपी और अकाली दल के वरिष्ठ नेताओं के साथ राजभवन जा पहुंचे और हरियाणवी शैली में ही उन्होंने राज्यपाल तपासे को गुस्से में खूब खरी-खोटी सुनाई। जिससे राज्यपाल तपासे डर से कांपने लगे।

 625 total views,  2 views today

Leave a comment