00 ये आज के ज़माने का भारत है – 1967 का नहीं | Bazinga

चीन की धोखेबाजी और दोगलेपन से हर कोई वाकिफ है। जहां एक ओर वह भारत -चीन सीमा पर शांति बनाये रखने की बात करता है ओर दूसरी तरफ, आये दिन चीनी सैनिक भारत की सीमा में घुसपैंठ करते रहते हैं। कुछ दिनों से भारत-चीन बार्डर पर चीनी सैनिक डिस्टर्बेंस क्रीएट कर रहे थे जिसके कारण वहां पर माहौल ख़राब हो रहा था। लेकिन इस बार लद्दाख की गलवन घाटी में भारत-चीन बार्डर पर सभी हदों को पर करते हुए चीन के सैनिकों ने धोखे से भारतीय जवानों पर हमला किया, भारत-चीन के सैनिकों के बीच इस हिंसक झड़प में एक कर्नल और दो भारतीय जवान शहीद हो गए हैं और कुछ चीनी सैनिक भी मरे गए हैं। कायर चीन की इस घटिया हरकत से पूरा देश गुस्से में है और चीन को सबक सिखाने के मूड में है। गलवन घाटी की घटना यही बता रही है कि पानी सिर के ऊपर बहने लगा है, दोस्ती की आड़ में दुश्मनी निभाना , भारत को नीचा दिखाना चीन की आदत बन गयी है। चीन भारतीय क्षेत्र में वायलेशन भी करता है और फिर भारत को शांति बनाए रखने का उपदेश देते हुए पीछे हटने से इन्कार भी करता है। अब चीन पर रत्ती भर भी विश्वास नहीं किया जाना चाहिए।


चीन को यह समझ जाना चाहिए कि उसकी दादागीरी का टाइम ख़त्म हो गया है, आज का भारत, 2020 का भारत है, भारत संयम रखना भी जानता है तो सबक सिखाना भी जानता है। भारत अपने वीर जवानों के बलिदान को व्यर्थ नहीं जाने देगा। देश के मान – सम्मान के लिए हमें हर मोर्चे पर चीन को हराना होगा , केवल यह नहीं कि आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत चीनी उत्पादों का आयात सीमित किया जाए, बल्कि भारत को अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान के साथ अपने रणनीतिक रिश्तों को मजबूत करना चाहिए, ताकि हिंद महासागर में चीन के विस्तारवादी इरादों को नाकाम किया जा सके और भारत को अपनी तिब्बत, ताईवान और हांगकांग नीति नए सिरे से तय करनी चाहिए। कोरोना कहर के कारण चीन के खिलाफ वैश्विक स्तर पर जो माहौल बना है, उसमें भी भारत को अपनी भागीदारी बढ़ानी चाहिए।

आखिर जब वह भारतीय हितों की कहीं कोई परवाह नहीं कर रहा तो फिर भारत उसके हितों की चिंता क्यों करे? चीनी कंपनियों का भी बायकॉट करना चाहिए उन्हें भारत में भी पांव रखने तक की जगह नहीं मिलनी चाहिए। भारत को शंघाई सहयोग परिषद जैसे मंचों से बाहर निकलने की भी तैयारी करनी चाहिए।

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