00 अर्श से फर्श पर आती भारतीय अर्थव्यवस्था – पर हमें क्या ? | Bazinga

आप तो जानते हैं कि अर्थव्यवस्थाओं की ज़रूरत हर दिन बदल रही है। आज किया गया सुधार कल पुराना पड़ जाता है लेकिन नीति आयोग के सी ई ओ अमिताभ कांत का कहना है कि पिछले कुछ सालों में भारत में जो सुधार किए गए हैं उनकी बुनियाद पर अगले तीस चालीस सालों में भारत का नया रूप देखने को मिलेगा। बड़ी आसानी से अमिताभ कांत अगले तीस चालीस साल की भविष्यवाणी कर रहे हैं।

जब नोटबंदी आई तो कहा गया कि दूरगामी परिणाम अच्छे होंगे पर चार साल बाद जब उसी दूरगामी परिणाम को खोजा जा रहा है तो कहीं कुछ नहीं मिल रहा। कुछ महीने पहले तक भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन थे उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था आई सी यू में है ,भारत में 1991 में भयंकर अर्थक संकट आया था। सरकार के पास पैसे नहीं थे लेकिन इस बार का संकट उससे भी गहरा है। इसी संकट की एक सज़ा पंजाब महाराष्ट्र कारपोरेशन बैंक के खाताधारक भुगत रहे हैं। उनका पैसा डूब गया है लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है।

पिछले साल अगस्त से लेकर नवंबर तक भारत का एक्सपोर्ट गिरा है। चमड़ा, जवाहरात, रेडीमेड गारमेंट. सबका निर्यात निगेटिव में रहा। इसका असर कम कमाई वाले लोगों पर पड़ा कई नौकरियां चली गयी। इस किसी का ध्यान न जाए इसलिए सबको उलझाए रखने के लिए हिन्दू मुस्लिम का एजेंडा चलाया जा रहा है। इस टॉपिक पर सभी लोग घंटो बहस कर सकते नहीं हैं। और तो और अब देश में आयत भी घटने लगा है जिससे जीएसटी कलेक्शन पर इसका असर पड़ रहा है जिसके चलते केंद्र सरकार राज्यों को बकाया राशि नहीं दे पा रही है।

केंद्र सरकार पर राज्यों का 50,000 करोड़ का बकाया हो गया है। यह पैसा राज्यों में नहीं पहुंचेगा तो व्यवस्था बनाने में मुश्किल होगी। राज्य अपना हिस्सा मांग रहे हैं और सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कह रहे हैं। अब सरकार जीसटी दरों के स्लैब में बदलाव कर इसे बढ़ाने के बारे में सोच रही है। इसी बीच सरकार ने 21 दवाओं के दाम 50 प्रतिशत तक बढ़ा दिए हैं। सरकार के पास पैसे नहीं है इसलिए सरकार अपना संसाधन बेचेगी।

पहले पावर सेक्टर में यही हुआ अब पेट्रोलियम सेक्टर में भी यही हो रहा है और लोग हैं कि हिन्दू मुस्लिम डिबेट में अपना दिमाग और वक्त खपा रहे हैं। राजनीति के जरिये असल मुद्दों को भुलाकर लोगो को बेवकूफ बनाना बहुत आसान बात है। इसलिए हमें खुद अपनेआप को मजबूत करना होगा और सरकार कि घटिया चालों से खुद को बचाना होगा।

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